शेगांव का योगी राणा श्री संत गजानन महाराज का रहस्योद्घाटन
कोंढाली-संवाददाता
श्रीसंत गजानन महाराज के चमत्कारिक लीला के कारण बुलढाणा जिले का शेगांव का नाम प्रसिद्ध हुआ। श्री संत गजानन महाराज की चमत्कारिक लीलाओं के माध्यम से श्री संत गजानन महाराज के जीवन रहस्योद्घाटन के लिये पारडसींगा गांव के विठ्ठल रखुमाई कला संच के द्वारा श्री संत गजानन महाराज लीलाओं के अंश *शेगाव चा योगी राणा संत गजानन* लघु नाटिकाओं के माध्यम से यहां के विठ्ठल मंदिर द्वारा आयोजित अखंड नाम संकिर्तन महोत्सव समारोह के अवसर पर 15दिसंम्बर को विठ्ठल मंदिर के परिसर के भव्य प्रांगण में प्रदर्शित की गयी,
*शेगांव का योगीराज संत गजानन* के कला संच के संचालक द्वारा बताया गया की संत गजानन महाराज भक्तों के कल्याण के लिए पहली बार माघ महीने में वैद्य सप्तमी के दिन शेगांव में प्रकट हुए थे। वह दिन शायद 1800 यानी 23 फरवरी 1878 का रहा होगा। श्री बंकटलाल नामक व्यावसायिक ने उन्हें पहली बार देखा जब वे देवीदास पातुरकर के घर पर भोजन के कार्यक्रम मे भोजन के लिये उपयोग मे लाई गयी पत्रावली भोजन के बाद घर के बाहर रखे गये पत्रावली मे लगा हुआअनाज खा रहे थे और पीने के लिए मवेशियों को रखने वाली जगह से पानी पी रहे थे।
तथा “गण गण गणत बोते” की धून लगातार गाते रहते थे। शारदा इसी लिऐ इन्हे गजानन नाम से जाने लगे.गजनन महाराज ने लगभग 32 वर्षों तक इस क्षेत्र के जनता को अनेक चमत्कारिक लीलाऐं देखी गयी। इसके बाद गजानन महाराज नाम से ख्याती मिलती गयी. श्री संत गजानन ने तरह-तरह के चमत्कार करके कई लोगों को दिव्य ज्ञानदान किया । उसमें महाराज नेलोगों को भक्तिमार्ग का महत्व बताया। वे एक सिद्ध योगी पुरुष के नांव से जाने जाते है।
यहां आयोजित श्री संत गजानन के अगाध लीलाओं मेंउन्होंने यह भी दिखाया कि भक्तों को सीधे भगवान पांडुरंगा के दर्शन कराए। जनराव देशमुख अपनी मृत्यु-प्रवण अवस्था से महाराज के चरण तीर्थ से अच्छे हुए । इसी प्रकार के एक ना अनेक चमत्कारिक घटनाओं का रहस्योद्घाटन कर इस अवसर हजारो महिला-पुरूषों का दिल जीत लिया.
इस अवसर पर इस नाट्य प्रयोग में कार्य करने वाले कलाकारों का भक्त जनो द्वारा स्वागत किया गया.
यहां आयोजित धर्मोत्सव के आयोजन में 19दिसंम्बर को दोपहर 12से शाम06 बजे तक श्री माऊली पालखी महोत्सव का भव्यतम् आयोजन किया गया है.
यह जानकारी आयोजन समितीके संयोजक द्वारा दी गयी है.
