लगातार हो रही बारिश से खरीफ फसलों पर खतरा बाॅक्स पहले बारिश की खेंच और इसके बाद लगातार बारिश का हल्का दौर शुरू है। 15 दिनों से बादलों के छाए रहने से धूप नहीं निकली है। इस तरह के मौसम के कारण अब सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों पर कई तरह की बीमारियों के साथ बची हुई फसलें लगातार बारिश के चलते अब इस वर्ष भी किसान परेशानीयोंसे घिर गया है।
संवाददाता -कोंढाली
पहले बारिश कुछ लेट हुई और इसके बाद लगातार बारिश का हल्का दौर शुरू रहा।अब15 दिनों से बादलों के छाए रहने से धूप नहीं निकली है। इस तरह के मौसम के कारण अब सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों पर कई तरह की बीमारियां दिखाई दी, सोयाबीन की फसल जो कुछ भी हात लगने वाली थी वह भी लगातार बारिश के चलते हांथ बाहार हो गयी है। जिससे किसान काफी परेशान होने लगे हैं। परेशानी की बात यह है कि किसानों ने इस बार सोयाबीन के बीज का इंतजाम करके बोवनी की और फसल भी तैयार होने लगी थी, लेकिन बीच में मौसम की बेरुखी के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
पिछले साल जब फसलों को नुकसान हुआ था तो 80 फीसद सोयाबीन की फसल अत्यधिक वर्षा के कारण बर्बाद हुई थी। इस वर्ष भी अभी तक यही स्थिति बन रही है। सबसे पहले बारिश नहीं हो रही थी तो फसलें सूखने लगी थीं। इसके बाद बारिश शुरू हुई तो पिछले 15 दिनों से धूप ही नहीं निकली। यही कारण है कि लगातार आसमान पर बादलों के छाए रहने से जो तापमान है, उसमें कीटों का प्रकोप अब दिखाई देने लगा है।
पिछले दो साल से सोयाबीन की फसलें खराब होने के कारण अंचल में इस बार बीज का टोटा हो गया था। सोयाबीन के बाजार में दाम अधिक होने के कारण किसानों ने इसकी बोवनी पर फिर से विश्वास किया और यहां-वहां से इंतजाम कर सोयाबीन के बीज लेकर बोवनी की। जब भी दिन और रात के तापमान में काफी कम अंतर बचे और लगातार आसमान पर बादल बने रहें तो इल्ली का प्रकोप दिखाई देने लगता है। अभी की बात करें तो 20अगस्त से लगातार बारिश की कभी रिमझिम तो कभी तेज बारीश के चलते धूप नहीं निकली है। इसलिए कीट प्रकोप होने लगा। जिसमें कोंढाली -मेटपांजरा सर्कल के साथ साथ संपूर्ण काटोल तहसील में यही हाल बना हुआ है। 25/30प्रतिशत बची फसल अब लगातार15दिनों से बारीश के चलते खडी फसल बरबाद हो रही है ,यह नष्ट होती फसल को देखते हुए किसान इन दिनों चिंतित नजर आ रहे हैं।
*नही रूक रहा संतरा की फल गलन*
काटोल तहसील में संतरा उत्पादक किसान प्रकाश बारंगे, सतिश चव्हान,सुरेन्द्र सिंह व्यास, संजय राऊत,याकूब पठाण, पुरुषोत्तम हागवणे द्वारा बताया गया है कि, इस वर्ष भी संतरा फसल की गलन रूकने के बजाय फल गलन तेज हो गयी है। फलस्वरूप संतरा जहां 25टन होना था वह दस टन आ सकता हैं,। वहीं 25हजार रूपये टन बिकने वाला संतरा फिल हाल सात से दस हजार रूपये टन के भाव उतर गये है, फलस्वरूप संतरा-मोसंबी उत्पादक किसानों में भी चिंता का वातावरण बना हुआ है।
इस संबंध में जिला कृषी अधिकारी मिलिंद शेंडे तथा तहसील कृषी अधिकारीयों से संपर्क करने पर उन्होंने बताया की बारिश के चलते किसानों के खरिफ फसलें तथा संतरा के बागानों को का नुसान हो रहा है।
इस वर्ष, पिछले वर्ष जैसा नुकसान ना हो इसलिए सभी जगह कृषी विभाग के अधिकारी तथा कर्मचारी टीमें किसानों के के खेतों पर पहुंच कर नजर रख रही हैं। नुकसान हुयी फसलों के जांच कर संतरा, मोसंबी, कपास, तथा अन्य फसलों को नुकसान से बचाये जाने के लिये किसानों के खेतों में पहूंचकर किसानों को उपाययोजना के लिये सलाह दी जा रही है।
परेशान किसानों के खतों का मुआवजा देने की मांग किसान प्रकाश बारंगे द्वारा की गयी है ।
