BREAKING NEWS:
ब्लॉग

कितने ‘आजाद’ हैं हम आज ‘स्वतं‍त्र’ भारत में…❓

Summary

पत्रकार यदुवंशी ननकू यादव भारत हमारा ‘स्वतंत्र’ देश। जिसके स्व‍तंत्र सुनने के आभास से ही हमारा मन हिलौरे भरने लगता है, एक सपनोंभरी उड़ान की धारा मन में बहने लगती है। काश! यही सच होता और हम स्वतंत्रता के इस […]

पत्रकार यदुवंशी ननकू यादव

भारत हमारा ‘स्वतंत्र’ देश। जिसके स्व‍तंत्र सुनने के आभास से ही हमारा मन हिलौरे भरने लगता है, एक सपनोंभरी उड़ान की धारा मन में बहने लगती है। काश! यही सच होता और हम स्वतंत्रता के इस अनुभव को कुछ फिल्मी तरीके से ही सही, कुछ समय के लिए उसमें समा सकते।

कहने को तो हम स्वतंत्र देश में रहते हैं, हम दर्शाते भी ऐसा ही हैं कि हम जैसे स्वतंत्र विचारों वाले, खुली सोच वाले, खुले दिल वाले इंसान इस‍ दुनिया में और कोई नहीं है। लेकिन हकीकत पर जब हम गौर करें तो नजारा कुछ और ही होता है, कुछ और ही दिखाई पड़ता है।

जी हां! यह बात कटु जरूर है, लेकिन सत्य है। जहां आज हम 77वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियां कर रहे हैं, वहीं इसमें बहुत कुछ परतंत्र भी है। इतने सालों की आजादी के बाद भी हम वास्तव में आजाद नहीं हुए हैं। कहने को, सुनने को हम आजाद दिख सकते हैं, लोगों के सामने अपनी प्रशंसा दिखाने और प्रशंसा पाने के लिए ऐसा भ्रम भी रच सकते हैं। लेकिन यह पूरी तरह सत्य नहीं हैं।

आज भी आप भारत देश के किसी भी‍ कोने में चले जाएं, कहीं न कहीं इस बात की सत्यता को जरूर परखेंगे। चाहे वो बात नेता-राजनेताओं, हमारे घर-परिवार, रिश्तेदारों की बात हो या फिर वर्किंग कल्चर की बा‍त हो। इस बात को आप नकार नहीं पाएंगे कि वास्तव में जो दिखता है, वैसा होता नहीं है…।

जब हमारा देश भारत अंग्रेजों के अधीन था, उस समय हर आदमी के जीवन का उद्देश्य भार‍‍त को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने का था। तब उनके पास इसके अलावा और कुछ भी सोचने के लिए नहीं था। आज स्वंतत्र भारत का परिदृश्य ही कुछ और है।

इस स्वतंत्र भार‍त में बातें तो हम स्वतंत्रता की बहुत करते हैं चाहे बात दिल्ली गैंगरेप कांड (एक बस में बलात्कार की शिकार हुई पैरामेडिकल छात्रा) की हो या हरियाणा के खाप पंचायत की हो, या मणिपुर की शर्मसार घटना जो पूरे देश को हिला के रख दिया या फिर मध्य प्रदेश के सीधी जिले में में एक आदिवासी के साथ पेशाब कांड या फिर अभी हाल में हुए मैहर में एक नाबालिग आदिवासी परिवार की 11 वर्ष की बच्ची के साथ दरिंदगी रीवा में एक और नाबालिग दरिंदगी किसी भी राज्य किसी व जिला में देख ले आओ सब जगह इसी तरह से दरिंदगी हो रही तो फिर हर रोज छोटी-बड़ी बालिकाओं, युवतियों या सरेराह छेड़छाड़ की शिकार होने वाली महिलाओं की हो। धनलोभियों द्वारा दहेज के लिए दी जाने वाली नारियों की बलि की हो, उन्हें टॉर्चर करना, मारना-काटना, जलाना- ये सब भार‍त के आम परिदृश्य हैं।

यहां तक कि उन्हें आत्महत्या जितना बड़ा घा‍तक कदम उठाने के लिए मजबूर करना और समाज को यह दिखाया जाना कि वह अपनी जिंदगी से परेशान थी इसलिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया है। कहीं भी नजरें उठाकर देख लीजिए इसमें स्वतंत्रता कहां दिखाई पड़ रही है?

आज के इस बदलते युग में एक ओर जहां युवतियां/नारियां हर मामले में पुरुषों की बराबरी कर रह‍ी हैं, वहीं आज भी कई घर ऐसे हैं जिसमें नारियों की वह बराबरी पुरुषों को, उनके घर वालों को रास नहीं आती। आज भी महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में कोई कमी नहीं आई है। आज भी भार‍‍त में दंगे-फसाद होते ही रहते हैं। कई आतंकवादी संगठन गलत चीजों का इस्तेमाल करके भार‍त और उसकी स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहते हैं। इससे कई घर, कई परिवार, कई गांव-कस्बे, कितने ही इंसान तबाह हो रहे हैं।

एक तरफ सत्ताधारी नेताओं द्वारा अपराधियों के साथ ‍किए गए गठजोड़ कई असामाजिक कार्यों को अंजाम दे रहे हैं फलस्वरूप दंगों, विस्फोटों और दुर्घटनाओं से देश त्रस्त है और बात करते हैं स्वतंत्रता की।

इन दंगों, बम विस्फोटों में जो भी मरे, जिनका भी नुकसान हुआ उससे किसी को कोई लेना-देना नहीं है। इससे देश के उन सफेदपोश नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता, न ही वे इसमें अपनी रुचि दर्शाते हैं। बस थोड़े दिन अपने भाषणों में आतंक और उन हमलों की निंदा करके वे अपने आपको बचाने में सफल हो जाते हैं।

आज भी स्वतंत्र भार‍त पर एक प्रश्नचिह्न लगा हुआ है! अगर सचमुच भारत देश स्वतंत्र है, आजाद है तो फिर उस आजादी की, उस स्वतंत्रता की सही मायने में क्या परिभाषा होनी चाहिए, यह आम आदमी की सोच से परे है।
🙏🌹🌹🌹🙏
देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस शुभकामनाएं वंदे मातरम मेरा भारत महान जय हिंद जय जवान जय किसान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *