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महाराष्ट्र हेडलाइन

🔹 अदृश्य —-ई श्र्व र —– अ ल्लाह—-गॉड 🔹 🔸 धर्म मुफ्त मे लूटने की दुकाने है 🔸 🔹तस्लिमा नसरीन ने धर्म का धंदा करनेवालोंकी खोली पोल 🔹

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उन्हों ने लिखा है —-मक्का से वैटिकन तक , कोविड 19 ने साबीत कर दिया है की इंसान पर संकटकी घडीमे भगवान मैदान छोड देते है. मक्का मे सबकुछ ठप है —-पोप का ईश्वर से संवाद स्थगित है —–ब्राह्मण पुजारी […]

उन्हों ने लिखा है —-मक्का से वैटिकन तक , कोविड 19 ने साबीत कर दिया है की इंसान पर
संकटकी घडीमे भगवान मैदान छोड देते है. मक्का मे सबकुछ ठप है —-पोप का ईश्वर से संवाद स्थगित है —–ब्राह्मण पुजारी मंदिरोमे प्रतिमोंको मास्क लगा रहे है —–
धर्मने कोरोना वाइरस से भयभीत इंसांनोको असहाय छोड दिया है—–काबा का चक्कर लगाने के रिवाज ‘ तवाफ ‘ से लेकर खुद उमरा ( तीर्थयात्रा ) तक मक्का मे सबकुछ ठप है —-
मदिनामे पैगंबर मोहम्मद के दफनाये जाणे के स्थल की तीर्थयात्रा भी रोक लगा दि गयी है—-सम्भव है , वार्षिक हज हबी स्थगित की जाए —– अनेको मजीदे जमे की नमाज स्थगित कर चुकी है—–कुवेत मे विशेष अजानो मे लोंगोंसे घर पर ही इ बादत करणेका आग्रह किया जा रहा है—–मौलवी , लोगोंको वायरस से बचनेके लिये मस्जिदो मे जाकर अल्लाह से दुवा करणेका दावा नहीं कर रहे .
🎯 ऐसा इसलीये है क्योकीं धर्म के ठेकेदारोनको अचंछि तरह मालूम है की अल्लाह हमे नोवेल कोरोना वायरस से बचाने नहीं आएगे . कोई बचा सकता है तो वे वैज्ञानिक है, जो टिके बनानेमे , उपचार ढू ढने मे व्यस्त है .
धर्म पर भरोसा करणे वाले बेवकुफो को इस घटनाक्रम से सर्वाधिक विस्मित होना चाहीये ! उन्हे सबसे अधिक सवाल पुछ ना चाहीये.
🎯 वे लोंग जो कोयी सवाल पुछे बिना झुंड बनाकर भेडचाल की प्रवृत्ती दिखाते है —– ना उन्हे ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण चाहीये , ना ही तार्किक्ता और मुक्त चिंतन में भरोसा है.
🎯 क्या आज उन्हे ये बात नहीं कचोटती होगी की जिन धार्मिक संस्थाओ को बिमारिके मददे नजर उनकी सहायता के लिये आगे आणा चाहीये था, वे आपणे दरवाजे बंद कर चुके ??
🎯क्या।धार्मिक संस्था ओ का मकसद आम लोगोंकी मददत करणा नहीं है ??
🎯 बहुतोंके लिये भगवान संरक्षक के समान है, और सलामती के लिए वे उनकी सांलोभर पूजा करते है —–लेकीन जब मानवता संकटमे होती है, तो आंमतौर पर सबसे पहले मैदान छोडने वाले भगवान ही होते है.
🎯 वैटिकन से लेकर मन्दिरों तक ,भगवान मैदान छोड चुके है.
🎯 धर्म और अंधविश्वास आंमतौर पर एक दुसरे के पूरक होते है.
🎯 क्या ये सब अविश्वनिय नहीं
है??
🎯 तो फिर भगवान कहा है ??
🎯 क्या धार्मिक लोगो के मनमे ये सवाल नहीं उठता??
🎯 धार्मिक स्थलों का क्या
मतलब है ??
🎯 सरकारो को तमाम धार्मिक संस्थाओ को दिये जानेवाले अनुदान और सबसिडी पर रोक लगानी चाहीए .
🎯 भला एई से संस्थान किस काम के है ??
🎯धार्मिक स्थलों को संग्रहालयो, विज्ञान अकादमीयो ,प्रयोगशालाओ और कला विद्यालयो मे बदल देना चाहीए——ताकी उनका जनता की भलाई के काम मे ईस्टमाल हो सके.
🎯 प्रकृती ने बार-बार साबीत किया है कि ” कोई भगवान नहीं है और धर्म एक परीकथा मात्र है.”
🎯 हालाकी बहु तसे लोंग , विशेष रूप से दुनिया के अधिक विकसित हिस्सो मे , खुद को धर्म के चुगल से निकालाने मे कामयाब रहे है ,पर जहा कही भी गरिबी है , सामाजिक असमंताए है, स्त्री विरोध और बरबरता है ,व हा भगवान और पूजा पाठ पर अतिनिर्भरता देखी जा सक ती है.
🎯 मनुष्य किसी विधाता द्वारा निर्मित नहीं है,बल की उसका वां नोरोसे विकास हुआ है. डार्विन से बहुत पहले 16 वी शताब्दी मे ही गॅलिलिओ और उनके पूर्ववर्ती कोपर्निकस ने अंतरिक्ष एवं ब्रह्माड की ,बायबल मे वर्णित धारणाओ को गल त साबीत कर दिया था —–इसके बावजु द दुनियामे अधिकांश लोग परमात्मा को मानते रहे है —–
🎯 अपणे विकासवाद के सिद्धांत के जरिये ,भगवान के अस्तीत्व को चार्लस डार्विन द्वारा नकारा जानेके लगभग 160 साल बीत चुके है.
🎯 उनके अदृश्य भगवान अदृश्य ही बने हुये है,उनके अस्तित्व का प्रमाण आज तक नहीं मिला है, लेकीन अंधविश्वास सतत कायम रहा है.ये सोच ने वाली बात है,तुम हम और धर्मके ठेकेदारोनके लीये.

🥏 पोलीस योद्धा वृत सेवा 🥏
🥏 महेश देवशोध (राठोड ) 🥏
🥏वर्धा, जिल्हा प्रतिनिधी 🥏
🥏7378703472 🥏

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